शनिवार, 19 जुलाई 2014

तिनका तिनका-2

1. विकास 
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विकास की योजना बनी, 
बैठक हुई, 
चर्चा हुई, 
जमीन की ख़ोज हुई, 
अनुमति मिली, 
बङी बङी मशीनें आई, 
पंखे लगने शुरु हुए, 
गांव में विरोध हुआ, 
कुछ की ज़ेबें भारी हुई, 
सहमति बनी, 
कुछ सफ़ेदपोश ठेकेदार बने, 
कुछ किसान बने, 
बचे खुचे खाली जमीनों के मालिक बने, 
किसी की नदियां रुकी, 
किसी की जमीन बिकी, 
अधिकारी आये, 
गांव के विकास का पैसा बंटा, 
ठेकेदारों ने डकारें ली, 
घर घर में गाङियां आई, 
कलह के बादल छाये, 
लाठियां टूटी, 
सिर फूटे, 
पंखे लग गये, 
कुछ बेरोजगारों ने जूगाङ भिङाया, 
घर-घर में चोर हुए, 
टपकती छतें हटी, 
पीले पत्थर के महल बने, 
शराब ठेकों की बिक्री बढी, 
तारें कटी, 
फ़िर आई, 
फ़िर कटी, 
पंखे बन्द, 
चरागाह खत्म, 
बोलचाल बन्द, 
खूब विकास हुआ। 
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2. धूल भरी रात
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दिन में भट्ठी
रात में कोरी मटकी
आक़ङे की सरसराहट
थोङी आँख में अटकी
घिरोळे में घूमी
ज़ाळ की आङ दिख़ी
चारपाई बिछी
चार किनारे भारी हुए
बोतल आई
गिलास मंगवाई
बोरी सिले क़ोरी मटकी आई
दो पानी मिले
थोङी तरणाटी आई
मांगणियार को बुलावा गया
सैणां रो बायरियो गवाया
चारपाई के कोने देखे,
सात बोतलें दिखी
आठ आंखे भारी हुई
रलियां-पथरने आये
दस आँखे बन्द हुई
धूल उङती रही
रात ग़ुजर गई।
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सुमेर

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