रविवार, 13 जुलाई 2014

तिनका तिनका

बरस जा रे भेवती बादळी,
हेला करे सूखी काकनी।
पीवजी गयोङा परदेश,
तुं बरसी तो पाछा आसे देश।
______

धूप और रेग़िस्तान
------------------
धूप नाज़ुक फूलों को जला सकती हैं,
धूप पानी में पली पत्तियों को जला सकती हैं,
ये रेग़िस्तान के सूखे कांटे और खिलते खींप हैं इनको जलाने के लिए तो चाहिए आग।
______


रंगीन पोस्टरों का मौसम आ गया,
हर दीवार हर बोर्ड पर नाम आ गया,
फेसबुक पर टैग का गुबार आ गया,
देखो छात्रसंघ चुनावों का मौसम आ गया।
______

इक अदना सा यूवक हूं,
कच्चा ही सही लेखक हूं,
शौकिया ही सही छायाचित्रकार हूं,
ठोठ ही सही विद्यार्थी हूं,
चोर, चापलूस तो हरगिज़ नहीं हूं।
______
सुमेर

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें