शुक्रवार, 22 अगस्त 2014

पुराने मकां मैं ताज़ा यादें


बदलाव प्रकृति का नियम हैं, और हमारे आस पास कई बदलाव हो रहे है। इन बदलावों के साथ हमारे से जुड़ी कई वस्तुएं हमसे छूटती जा रहीं हैं। हमारे ग्रामीण जीवन की कई वस्तुएं जो हमारे घर का अभिन्न अंग थी, धीरे-धीरे घर से दूर हो गई। आज मैं आपको अपने खेत मैं बने पुराने मकान में मौजूद कुछ वस्तुओं के माध्यम से प्राचीन ग्रामीण जीवन की सैर करवा रहा हूँ। उम्मीद हैं की मेरी ये चिठ्ठी आपको पसंद आएगी।

चले हाईवे पर फर्राटे से पगडण्डी भी लगती है प्यारी ये अपना गांव कनेक्शन हैं। गांव कनेक्शन की ये पंक्तिया इस चिठ्ठी पर सटीक बैठती है। 
ये है खेत मैं बने उस पुराने मकान की और जाती पगडण्डी।





ये वो मकान जो इन वस्तुओं के जानकार लोगों को यादों में बहा ले जायेगा और अनभिज्ञ लोगों को नई वस्तुओं से रूबरू करवाएगा।



खुलने के इन्तजार मैं ये जंग लगा ताला उस समय के ताले ऐसे होते थे।




बील।
बील। यह यहाँ के घरों का मुख्य आकर्षण हैं। दीवार पर मिटटी के मिश्रण से इसे बनाया जाता हैं। इसमें सीधी लकड़ियाँ डाली जाती है जो पुरे भाग को जोड़े रहती है। इसके अंदर छोटे बर्तन एवं सजावटी सा
मान रखा जाता हैं।


घर का मुख्य दरवाजा।

पुराना टेप रिकार्डर।
चिंयाल।
चिंयाल।
चिंयाल। पहले यहाँ पर छत बनाने के लिए पत्थर की पट्टियों की जगह लकड़ियाँ लगाई जाती यही जिन्हे चिंयाल कहते है। चिंयालो की छत ठंडी रहती हैं।

कोठारियो।
कोठारियो।
कोठारियो। दूध, दही, घी, छाछ आदि चीजों को रखने के लिए बना देसी फ्रीज़। यह मिटटी का बना होता है।
हरिण का सींग
हरिण का सींग यह औरतें अपना माथा घुंथने के लिए प्रयोग करती थी।
कोठी
कोठी इसका प्रयोग अनाज को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता था।
तणी
तणी क
ड़े एवं कम्बल रखने के लिए इसका प्रयोग होता है। यह लकड़ी से बनी है।
उजड़े मकान मैं आबाद हरियाली





घर के अंदर से खडीन का दृश्य।




परनाल छत के पानी की निकासी के लिए बनाई गया है।




घर के अंदर का दृश्य।





दरवाजे(बरसाख) पर की गई कारीगरी।




तस्वीरें उतारने का बाद लौटता सुमेरा।



इन सब तस्वीरों को मिलकर बनाया गया एक छोटा सा Video, आपको जरूर पसंद आएगा, देखिएगा - Purana Makaan


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