मंगलवार, 16 सितंबर 2014

बदल रही है अपनी हिंदी

बदल रही है अपनी हिंदी
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नित नये आयाम बनाती
सबको अपने में समाती
समय के साथ दौङ लगाती,
बदल रही है अपनी हिंदी।

जुङते हमेशा कईं नये शब्द
कईं पुराने लुप्त हो रहे
अपनी जगह अनवरत बनाये,
बदल रही है अपनी हिंदी।

कोई कहे हिंद की भाषा
कोई कहे दिल की भाषा
सीख रहे विदेशी भी,
बदल रही है अपनी हिंदी।

सुमेर

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