मंगलवार, 9 सितंबर 2014

Zindagi Gulzar Hai

Playing Lights- SumeraChitra

एक टीस होती हैं दिल में जो किसी शुभ दिन हरी होकर मचल उठती हैं और बहती रहती हैं दिनभर आँखो के रास्ते। कितनी तकलीफ़देह होती हैं सुनहरी यादें हालांकि हैं अब भी सुनहरी पर वो यादें ज़ब आँखो के रास्ते निकलती हैं तब तकलीफ़ असह्य हो जाती हैं।
कभी-कभी खुद पर बेहिसाब क्रोध आता हैं, दूसरों को जो समझाते हैं वो खुद पर लागू करना मुश्किल होता हैं। जब कुछ खो देते हैं तो वह किसी और में पाने की कोशिश बहलाने का बहाना मात्र होती हैं। हम प्रतिबिम्ब ढूंढने का प्रयास करते हैं जबकि हम जानते हैं प्रतिबिम्ब तो उसी के साथ होता हैं हमेशा फिर भी भटकते हैं। और तब खुद पर क्रोधित होने के सिवाय और कोई चारा नहीं बचता और मेरे लिए उस क्रोध को आँखो के रास्ते निकालने के बजाय पहाङियों पर कूदने और अपना मन कांधे पर उठाये घूमना हमेशा सरल रहा हैं और आज खुद पर क्रोध और खीज ने पहाङ और अपना मन कांधे पर होते हूए भी आँखो से निकलना मुनासिब समझा।


इलाही मेरा जी आये जी आये।

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