शुक्रवार, 16 जनवरी 2015

ज़िंदगी मिगज़रा

रास्ते खुद-ब-खुद खुल जायेंगे राही तू कदम तो बढा।
रचनात्मकता की और शुरू से मेरा झुकाव रहा है और यह झुकाव पिछले कुछ समय से मुझे कईं बेहतरीन तोहफे दे रहा है। पहले तस्वीरों और लिखावट के बाद अब आवाज़ की दुनिया में प्रवेश।
फ़ोटोग्राफी और लिखने/पढने के शौक ने मुझे आभासी दुनिया में कई दोस्तों से रूबरू करवाया।
आभासी दुनिया से निकलकर जमीनी स्तर पर कार्य करने की चाहत ने मुझे आकाशवाणी से जोड़ा और आकाशवाणी ने कईं बेहतरीन लोगों से मिलने का मौका दिया और वो भी केवल पांच दिनों में।
एक व्यक्ति पाँच दिनों में इतना सीखा दे जो पिछले पंद्रह सालों में नहीं सीख सके (इसे अति में ना लें मुझे अपने विद्यालयी जीवन में कोई ऐसा शिक्षक नहीं मिला जो लकीर से हटकर किताबों से अलग पढाये)
यह अनुभव अविस्मरणीय रहेगा सदैव।
इन पाँच दिनों में उम्मीदों से कईं गुना बढकर जो ज्ञान आनंद जी सर ने दिया उम्मीद है कि उसका परिणाम भी दिखाई देगा।
शुक्रिया सभी प्यारे लोगों का भी जिनसे इन पाँच दिनों में बहूत कुछ सीखने को मिला।

वो खिलाड़ी थे माहिर,
कुछ तो हम भी सीख गये,
ना चुरा सके नींद भले,
पर कुछ देर तो जगा आये।

~सुमेर


2 टिप्‍पणियां:

  1. Bahot accha likha sumer... I hope tum zindgi me bahot uncha mukaam haansil karoge ek din... Ishwar tumhari har manokaamna puri kare...

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    1. शुक्रिया सर, आपकी उम्मीदों पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करूंगा।

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