गुरुवार, 22 जनवरी 2015

थार ट्रैल

कितना अपनापन है इस हवा में। रेगिस्तान के बीचो-बीच बनी किसी अकेली पठियाळ में कुछ पल कितने सुकूनदायक होते है। लोग क्यों नहीं समझते प्रकृति के इस अपनापन को? मेरे लिए पहला और अंतिम प्यार प्रकृति के ये प्राकृतिक नज़ारे हैं, छोटी-छोटी प्यारी झाड़ियां, धोरे, पशू पक्षी, हवा और अथाह रेगिस्तान के बीच छोटी-छोटी पहाड़िया। पशू-पक्षियों और हवा की आवाज़ों से मिलकर बना दिल को छू लेने वाला संगीत।

इनके बिना मेरा हर क्षण अधूरा है। और सबसे बेहतरीन चीज़ ये कि प्रकृति के नज़ारे उस ब्.. फ... प्यार की तरह कभी धोखा नहीं देते। बस सुकून, शांति, प्यार और 'ज़िदगी मिगज़रा'।









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