मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

भारी रात

कहां हो?

चौराहे पर टहल रहा हूं।

और कौन है?

अकेला।

अरे! अकेले इस समय?

क्यों क्या हूआ?

क्या क्या! पिछली बार हमने शिवरात्रि तुम्हारे गाँव में मनाई थी ना?

तो?

तो क्या! गाँववालों ने क्या बोला था जब हम बाहर जा रहे थे?

क्या बोला था?

तुम्हे पता नहीं, वो बोल रहे थे ना कि आज की रात 'भारी रात' होती है अकेले बाहर नहीं जाना चाहिेए.....😳


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