सोमवार, 8 जून 2015

रात बिरत रा आखर- २ (झपकियाँ)

दिन भर छुपता रहा सूरज बादलों की आड़ में,
रात को निकल आई हवा कुछ छूने की ताड़ में।

सुबह आँख खुली, उनींदे ही तकिये को टटोलकर मोबाइल निकाला देखा तो ६:३० बज रहे थे। आजकल सबसे पहले उठते ही मोबाइल देवता के चरण स्पर्श करने की ऐसी आदत लग गई है कि पूछो ही मत। रात को अढाई बजे भी आँख खुल जाये तो हाथ बिस्तर टटोलने लगता है मोबाइल खोजने के लिए। दिमाग में दो चीज़ें दौड़ गई, ऑफिस और ४० पन्ने। आज बाइक है ऑफिस की तो दिक्कत नहीं चलो थोड़ी और नींद हो जाये, झपकियां लेते लेते चालीस पन्ने याद आ गये।
कल ही तीन किताबें पहूंची थी मम्मा की डायरी, ज़ादू भरी लड़की और फाइव पॉइंट समवन। टेबल की तरफ़ देखा तो लगा कि फाइव पॉइंट समवन पुकार रही है, अंग्रेजी सीख ले।
किताबों का मुझे शुरू से शौक रहा है और आज तक पूरी शायद ही कोई पढी हो। कारण मुझे भी नहीं पता कि किताबें पूरी क्यों नहीं होती हैं, हो सकता है आलसीपन इसकी वजह हो।
फाइव पांइट समवन उठाई पढनी शुरू की तो थ्री इडियट आँखो के सामने आने लगी, २० वें पन्ने तक पहूंचते-पहूंचते चक्कर आने लगे बहूत कम पढने का नतीजा दिखने लगा। जैसे तैसे करके २४ पन्ने पढे और मन को समझाया कि शुरूआत है कोई नहीं धीरे-धीरे बढेंगे।
रोज ऑफिस जाते वक्त एक मोड़ पर ऐसा दिलकश दृश्य नज़र आता है कि तस्वीर उतार लूं, पर आलस्य महाराज यहाँ भी हावी हो जाते है। कैमरा पीठ पीछे बैग में कैद बाहर आने को तड़पता रह जाता। पर आज निश्चय कर लिया कि फोटो खींच कर ही रहूंगा और आलसी बिना तैयारी ही काम करते है। बाइक किनारे की, कैमरा निकाला और ज्यों ही क्लिक बटन दबाया कि बीप कि आवाज़ आई, स्क्रीन देखी तो लिखा हूआ था मेमोरी कार्ड नॉट इंसर्टेड। उफ़्फ़ मेरी मेमॉरी कुछ भी याद नहीं रहता, कार्ड तो लेपटॉप में ही भूल आया।
सामान समेटा और निकल पड़ा।

 मोबाइल जेब से निकाला तो नॉटिफिकेशन देखा। डाटा खत्म हो चुका था और उसके बाद भी इंटरनेट चालू रहने रहने के कारण बैलेंश अपने सबसे निचले स्तर पर था। बहूत वक्त बाद पूरे दिन इंटरनेट सोया रहा। शाम होते ही जाग उठा।
अंधेरे में हवा पत्तों से टकराकर शोर मचा रही थी, दूर टंकी के पास से मेढकों की आवाज़ हवा के साथ संगत कर रही थी। काफी वक्त हो गया था अपने पसंदीदा ब्लॉग को पढे, कुछ देर तारों को निहारने के बाद उस ब्लॉग में घुस गया, कईं पोस्टें लगातार पढ ली।
नींद अब भी कोसों दूर थी। नोट्स में गया और अंगुठा नृत्य करने लगा, अंगुठे के सामने नोट्स में अक्षर भी उछलकूद करने लगे।
और अंतिम लाइन लिखने तक झपकियाँ.........


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